मैं बताऊँ क्या कि कितनी गहरी हैं आँखें तुम्हारी
हू-ब-हू लगती समुंदर जैसी हैं आँखें तुम्हारी
ये गुलाबी होंठ बिखरी ज़ुल्फ़ ये रुख़सार पे तिल
और फिर हाए क़यामत ढाती हैं आँखें तुम्हारी
कोई मुझ जैसा हो या फिर शाह या कोई क़लंदर
सबको दीवाना बना कर रखती हैं आँखें तुम्हारी
यार आख़िर तुमको चेहरा ढकने से है फाएदा क्या
क़त्ल लोगों को किया तो करती हैं आँखें तुम्हारी
मुसलसल कोशिशों के बाद मैं उस बाब तक पहुँचा
सो फिर जाके कहीं जाना मैं तेरी ख़्वाब तक पहुँचा
खुदा जाने कहाॅं खो बैठा था 'रोवेज' मैं ख़ुद को
सो ख़ुद की जुस्तुजू करते हुए महताब तक पहुँचा
जो लिखा दीवारों पे था नाम तेरा मिट रहा है
तू भी यानी मेरे दिल से रफ़्ता-रफ़्ता मिट रहा है
रेत पे लिक्खा हुआ वो नाम मिट जाता है जैसे
वैसे ही तो मेरे दिल से तेरा चेहरा मिट रहा है
न जाने मुझको तेरे बाद दोस्त ये हो क्या रहा
तिरे लिए लिखा हुआ मैं ग़ैर को सुना रहा
मुझे जिससे मुहब्बत है मुहब्बत है
करें क्या जिसको नफ़रत है मुहब्बत है
उसे किसकी ज़रूरत है बताऊँ मैं
उसे जिसकी ज़रूरत है मुहब्बत है
खुदा तुझसे शिक़ायत क्यों करूँ मैं अब
अगर मुझपे ही ग़ुर्बत है मुहब्बत है
जहाँ खतरा है जाने से वाँ जाने की
मुझी को तो नसीहत है मुहब्बत है
मुहब्बत करने की गर उस सितमगर से
किसी में दोस्त हिम्मत है मुहब्बत है
कोई दिक्कत नहीं है मुझको उससे दोस्त
अगर वो बे-मुरव्वत है मुहब्बत है
तू चल अब मौत आके बोली मुझसे कल
ग़मों से यानी रुख़्सत है मुहब्बत है
मुझे जो हो रहा है ये किसी को क्यों बताना है
वफ़ा के नाम पर ही तो मुझे गर्दन कटाना है
जहाँ चाहो ख़ुशी से तुम चले जाना मगर सुन लो
हमारे बीच जो कुछ है हुआ तुम को मिटाना है
किया था एक वादा जो अगर कुछ याद हो तुम को
खिंचाए साथ जो तस्वीर उनको फिर जलाना है
अभी तो जा रही हो तुम मगर इक रोज़ यूँ होगा
तुम्हें फिर देखना मेरी कहानी गुनगुनाना है
सितमगर, बेरहम, ज़ालिम, न जाने और क्या हो तुम
तुम्हीं में आदतें हैं ये कि ऐसा ही घराना है