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Rowej sheikh 'saad' shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Rowej sheikh 'saad''s shayari and don't forget to save your favorite ones.
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तसव्वुर था उसे ख़ुद की मुकम्मल सी ग़ज़ल कहता
नदामत है कि वो दुल्हन किसी की बन चुकी होगी
लगा के ज़ख़्म पर जानाँ नमक हँसकर ग़ज़ल कहना
बहुत होता है मुुश्किल फिर सनम तुझपर ग़ज़ल कहना
सजी होती है इक महफ़िल पुराने यार होते हैं
वही पीना पिलाना और ज़ियादा-तर ग़ज़ल कहना
बे-वफ़ाई का तुम को भी तमगा लगा
हार कर इश्क़ में यार कैसा लगा
हो के आई हो लाचार बेबस यहाँ
देखकर तुमको यूँ दिल को अच्छा लगा
तुम को हम से उलझन कौन हो तुम
इश्क़ के जानी दुश्मन कौन हो तुम
जिसको दिया था कंगन तुम वो नहीं
लौटा रही हो कंगन कौन हो तुम
चाहता हूँ मैं कि इक जलता दिया रह जाए
दर्द ये घाव मिरा ज़ख़्म हरा रह जाए
बद्दुआ है ये मुहब्बत हो किसी से तुझ को
रूह ले जाए वो बस जिस्म तिरा रह जाए
पागल था मैं भी गैरों से क्या माँगता रहा
उम्मीद थी वफ़ा की वफ़ा माँगता रहा
मैं उससे माँगता भी तो क्या और माँगता
अपनी वफ़ा का यार सिला माँगता रहा
मुसलसल कोशिशों के बाद मैं उस बाब तक पहुँचा
सो फिर जाके कहीं जाना मैं तेरी ख़्वाब तक पहुँचा
खुदा जाने कहाॅं खो बैठा था 'रोवेज' मैं ख़ुद को
सो ख़ुद की जुस्तुजू करते हुए महताब तक पहुँचा
जो लिखा दीवारों पे था नाम तेरा मिट रहा है
तू भी यानी मेरे दिल से रफ़्ता-रफ़्ता मिट रहा है
रेत पे लिक्खा हुआ वो नाम मिट जाता है जैसे
वैसे ही तो मेरे दिल से तेरा चेहरा मिट रहा है
न जाने मुझको तेरे बाद दोस्त ये हो क्या रहा
तिरे लिए लिखा हुआ मैं ग़ैर को सुना रहा