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Farhat Abbas Shah

Top 10 of Farhat Abbas Shah

Farhat Abbas Shah

Top 10 of Farhat Abbas Shah

    गीत लिक्खे भी तो ऐसे के सुनाएँ न गए
    ज़ख़्म यूँ लफ़्ज़ों में उतरे के दिखाएँ न ग‌ए

    आज तक रक्खे हैं पछतावे की अलमारी में
    एक दो वादे जो दोनों से निभाएँ न गए
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    Farhat Abbas Shah
    10
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    ये दिल मलूल भी कम है उदास भी कम है
    कई दिनों से कोई आस पास भी कम है

    हमें भी यूँ ही गुजरना पसंद है और फिर
    तुम्हारा शहर मुसाफ़िर-शनास भी कम है
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    Farhat Abbas Shah
    9
    33 Likes
    कहीं से दुख तो कहीं से घुटन उठा लाए
    कहाँ-कहाँ से न दीवानापन उठा लाए

    अजीब ख़्वाब था देखा के दर-ब-दर हो कर
    हम अपने मुल्क से अपना वतन उठा लाए
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    Farhat Abbas Shah
    8
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    बदल गए मेरे मौसम तो यार अब आए
    ग़मों ने चाट लिया ग़म-गुसार अब आए
    Farhat Abbas Shah
    7
    41 Likes
    तू है सूरज तुझे मालूम कहाँ रात का दुख
    तू किसी रोज़ मेरे घर में उतर शाम के बा'द
    Farhat Abbas Shah
    6
    47 Likes
    कहा मैं कहाँ हो तुम
    जवाब आया जहाँ हो तुम

    मिरे जीवन से ज़ाहिर हो
    मिरे ग़म में निहाँ हो तुम

    मिरी तो सारी दुनिया हो
    मिरा सारा जहाँ हो तुम

    मिरी सोचों के मेहवर हो
    मिरा ज़ोर-ए-बयाँ हो तुम

    मैं तो लफ़्ज़-ए-मोहब्बत हूँ
    मगर मेरी ज़बाँ हो तुम
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    Farhat Abbas Shah
    5
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    आग हो तो जलने में देर कितनी लगती है
    बर्फ के पिघलने में देर कितनी लगती है

    चाहे कोई रुक जाए चाहे कोई रह जाए
    काफिलो को चलने में देर कितनी लगती है

    चाहे कोई जैसा भी हम सफ़र हो सदियों से
    रास्ता बदलने में देर कितनी लगती है

    ये तो वक़्त के बस में है के कितनी मोहलत दे
    वरना वक़्त ढलने में देर कितनी लगती है
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    Farhat Abbas Shah
    4
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    इसी से होता है ज़ाहिर जो हाल दर्द का है
    सभी को कोई न कोई वबाल दर्द का है

    सहर सिसकते हुए आसमान से उतरी
    तो दिल ने जान लिया ये भी साल दर्द का है

    ये झाँक लेती है दिल से जो दूसरे दिल में
    मेरी निगाह में सारा कमाल दर्द का है

    अब इस के बा'द कोई राब्ता नहीं रखना
    ये बात तय हुई लेकिन सवाल दर्द का है

    ये दिल ये उजड़ी हुई चश्म-ए-नम ये तन्हाई
    हमारे पास तो जो भी है माल दर्द का है

    न तुम में सुख की कोई बात है न मुझ में है
    तुम्हारा और मेरा मिलना विसाल दर्द का है

    किसी ने पूछा के 'फ़रहत' बहुत हसीन हो तुम
    तो मुस्कुरा के कहा सब जमाल दर्द का है
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    Farhat Abbas Shah
    3
    15 Likes
    इसी से जान गया मैं कि बख़्त ढलने लगे
    मैं थक के छाँव में बैठा तो पेड़ चलने लगे

    मैं दे रहा था सहारे तो इक हुजूम में था
    जो गिर पड़ा तो सभी रास्ता बदलने लगे
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    Farhat Abbas Shah
    2
    73 Likes
    तू ने देखा है कभी एक नज़र शाम के बा'द
    कितने चुप-चाप से लगते हैं शजर शाम के बा'द

    इतने चुप-चाप कि रस्ते भी रहेंगे ला-इल्म
    छोड़ जाएँगे किसी रोज़ नगर शाम के बा'द

    मैं ने ऐसे ही गुनह तेरी जुदाई में किए
    जैसे तूफ़ाँ में कोई छोड़ दे घर शाम के बा'द

    शाम से पहले वो मस्त अपनी उड़ानों में रहा
    जिस के हाथों में थे टूटे हुए पर शाम के बा'द

    रात बीती तो गिने आबले और फिर सोचा
    कौन था बाइस-ए-आग़ाज़-ए-सफ़र शाम के बा'द

    तू है सूरज तुझे मा'लूम कहाँ रात का दुख
    तू किसी रोज़ मेरे घर में उतर शाम के बा'द

    लौट आए न किसी रोज़ वो आवारा-मिज़ाज
    खोल रखते हैं इसी आस पे दर शाम के बा'द
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    Farhat Abbas Shah
    1
    6 Likes
Ali ZaryounAli ZaryounAleena ItratAleena ItratShahid ZakiShahid ZakiFarhat EhsaasFarhat EhsaasShariq KaifiShariq KaifiMehshar AfridiMehshar AfridiAllama IqbalAllama IqbalMohammad AlviMohammad AlviJosh MalihabadiJosh MalihabadiFaiz Ahmad FaizFaiz Ahmad Faiz