अपने शब-यारों से किस तरह मैं ग़ाफ़िल हो जाऊँ
आसमाँ जाग रहा है तो मैं कैसे सो जाऊँ
आसमाँ जाग रहा है तो मैं कैसे सो जाऊँ
दिल-ब-दर मैं भी हूँ और तू भी है मा'ज़ूल-नज़र
तू इजाज़त दे अगर मुझ को मैं तेरा हो जाऊँ
वक़्त ने इतने बदलवाए हैं चेहरे मुझ से
ख़ौफ़ है भीड़ में इन की न किसी दिन खो जाऊँ
जहल की बाँझ ज़मीनों में न अग पाऊँगा
इल्म-परवर हो ज़मीं कोई तो ख़ुद को बो जाऊँ
अब्र-ए-ग़म दिल का बरस जाए तो इस पानी से
दाग़ धब्बे हैं जो आँखों में उन्हें भी धो जाऊँ
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और अब अक़्ल का बार नहीं गर सह सकते हो
दिल के इस पागल-ख़ाने में रह सकते हो
दिल के इस पागल-ख़ाने में रह सकते हो
मेरे दिल में रहना रास नहीं आया तो
बे-शक आँख से आँसू बन कर बह सकते हो
तुम सर-ता-पा आग हो मैं हूँ टोटल पानी
साफ़ है मेरे साथ नहीं तुम रह सकते हो
पत्थर-वत्थर ज़ालिम-वालिम बेहिस-वेहस
मुझ को जो भी कहना चाहो कह सकते हो
मिट्टी होता तो पी जाता पर शीशा हूँ
मेरे ऊपर बे-फ़िक्री से बह सकते हो
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कोई ताज़ा हो कि हो कोई पुरानी चाहिए
वक़्त को आगे बढ़ाना है कहानी चाहिए
वक़्त को आगे बढ़ाना है कहानी चाहिए
तू मिरी दहलीज़ पर आ कर ठहर जाता है क्यूँ
तू तो दरिया है तुझे तो बस रवानी चाहिए
हाथ में जिस के भी देखो आग का कश्कोल है
और हर इक कश्कोल को कुछ बूँद पानी चाहिए
ज़िंदगी और मौत दोनों में है इक रंग-ए-करम
तुम बताओ तुम को किस की मेहरबानी चाहिए
दिल से मतलब है तिरे पैकर से मुझ को क्या ग़रज़
हुक्मरानी को मुझे इक राजधानी चाहिए
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नसीब अब के ख़ुशी बे-हिसाब ले आया
चराग़ लेने गया आफ़्ताब ले आया
चराग़ लेने गया आफ़्ताब ले आया
अभी जला के उठा हूँ पुराने ख़्वाबों को
वो मेरे वास्ते फिर ताज़ा ख़्वाब ले आया
फिर आज भाव समुंदर का आसमान पे था
फिर आज अपने लिए मैं सराब ले आया
फ़सुर्दा देख के उस को बहुत पशेमाँ हूँ
मैं रेगज़ार में क्यूँ इक गुलाब ले आया
तुझे तो हाँ या नहीं में जवाब देना था
जवाब में तू मुकम्मल किताब ले आया
अभी चला ही था दिल इक गुनाह करने को
कि ज़ेहन जा के ख़याल-ए-अज़ाब ले आया
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