मैं ने जो कुछ भी सोचा हुआ है, मैं वो वक़्त आने पे कर जाऊँगा
तुम मुझे ज़हर लगते हो और मैं किसी दिन तुम्हें पी के मर जाऊँगा
तुम मुझे ज़हर लगते हो और मैं किसी दिन तुम्हें पी के मर जाऊँगा
तू तो बीनाई है मेरी तेरे अलावा मुझे कुछ भी दिखता नहीं
मैं ने तुझ को अगर तेरे घर पे उतारा तो मैं कैसे घर जाऊँगा
चाहता हूँ तुम्हें और बहुत चाहता हूँ, तुम्हें ख़ुद भी मालूम है
हाँ अगर मुझ से पूछा किसी ने तो मैं सीधा मुँह पर मुकर जाऊँगा
तेरे दिल से तेरे शहर से तेरे घर से तेरी आँख से तेरे दर से
तेरी गलियों से तेरे वतन से निकाला हुआ हूँ किधर जाऊँगा
10
245 Likes
9
297 Likes
8
237 Likes
7
568 Likes
आईने आँख में चुभते थे बिस्तर से बदन कतराता था
एक याद बसर करती थी मुझे मैं साँस नहीं ले पाता था
एक याद बसर करती थी मुझे मैं साँस नहीं ले पाता था
एक शख़्स के हाथ में था सब कुछ मेरा खिलना भी मुरझाना भी
रोता था तो रात उजड़ जाती हँसता था तो दिन बन जाता था
मैं रब से राब्ते में रहता मुमकिन है की उस से राब्ता हो
मुझे हाथ उठाना पड़ते थे तब जा कर वो फोन उठाता था
मुझे आज भी याद है बचपन में कभी उस पर नजर अगर पड़ती
मेरे बस्ते से फूल बरसते थे मेरी तख्ती पे दिल बन जाता था
हम एक ज़िंदान में ज़िंदा थे हम एक जंजीर में बढ़े हुए
एक दूसरे को देख कर हम कभी हंसते थे तो रोना आता था
वो जिस्म नज़र-अंदाज़ नहीं हो पाता था इन आँखों से
मुजरिम ठहराता था अपना कहने को तो घर ठहराता था
6
130 Likes
कैसे उस ने ये सब कुछ मुझ से छुप कर बदला
चेहरा बदला रस्ता बदला बा'द में घर बदला
चेहरा बदला रस्ता बदला बा'द में घर बदला
मैं उस के बारे में ये कहता था लोगों से
मेरा नाम बदल देना वो शख़्स अगर बदला
वो भी ख़ुश था उस ने दिल देकर दिल माँगा है
मैं भी ख़ुश हूँ मैं ने पत्थर से पत्थर बदला
मैं ने कहा क्या मेरी ख़ातिर ख़ुद को बदलोगे
और फिर उस ने नज़रें बदलीं और नंबर बदला
5
437 Likes
थोड़ा लिक्खा और ज़ियादा छोड़ दिया
आने वालों के लिए रस्ता छोड़ दिया
आने वालों के लिए रस्ता छोड़ दिया
तुम क्या जानो उस दरिया पर क्या गुज़री
तुम ने तो बस पानी भरना छोड़ दिया
लड़कियाँ इश्क़ में कितनी पागल होती हैं
फ़ोन बजा और चूल्हा जलता छोड़ दिया
रोज़ इक पत्ता मुझ में आ गिरता है
जब से मैं ने जंगल जाना छोड़ दिया
बस कानों पर हाथ रखे थे थोड़ी देर
और फिर उस आवाज़ ने पीछा छोड़ दिए
4
267 Likes
3
460 Likes
2
1283 Likes










