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तभी गर्दिश में है तारा हमारा
किसी ने दिल नहीं तोड़ा हमारा
किसी ने दिल नहीं तोड़ा हमारा
न होती नौकरी तो सोचता हूँ
वो तब भी देखती रस्ता हमारा
गुलाबी धूप छत पर आ गई है
निकल आएगा अब चंदा हमारा
वो सावन और था दिन और थे तब
तिरी बाँहों में था झूला हमारा
लगा दी आग रिश्तों में हमीं ने
हमीं को खा गया ग़ुस्सा हमारा
किसी की बद्दुआओं का असर है
समुंदर पी गया सहरा हमारा
नहीं सदियों रुके आँसू हमारे
हमीं पर जब खुला क़िस्सा हमारा
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मेरे नादाँ दिल उदासी कोई अच्छी शय नहीं
देख सूखे फूल पर आती नहीं हैं तितलियाँ
देख सूखे फूल पर आती नहीं हैं तितलियाँ
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क्या पता था इस तरह तुझ से जुदा हो जाएँगे
ढूँढ़ने में तुझ को ख़ुद ही लापता हो जाएँगे
ढूँढ़ने में तुझ को ख़ुद ही लापता हो जाएँगे
रौशनी की चाह में भटकेंगे पहले दर-ब-दर
और फिर हम ख़ुद-ब-ख़ुद जलता दिया हो जाएँगे
इस लिए भी बात अपने दिल की मैं कहता नहीं
जानता हूँ लोग सब मुझ से ख़फ़ा हो जाएँगे
लोग अक्सर पूछते हैं मुझ से तेरी रहगुज़र
ऐसे तो हम एक दिन तेरा पता हो जाएँगे
साथ तेरे जाएगी आँखों से ये बीनाई भी
और आख़िर को सभी मंज़र फ़ना हो जाएँगे
रास्ता पूछेगा कोई कुछ न बोलेंगे 'विकल'
हाँ मगर हम ख़ुद उसी का रास्ता हो जाएँगे
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कुछ बाहर कुछ भीतर भीतर रोते हैं
इश्क़ में पड़ने वाले अक्सर रोते हैं
इश्क़ में पड़ने वाले अक्सर रोते हैं
मेघ गरजते हैं और बारिश होती है
धरती पर जब मस्त-कलंदर रोते हैं
तेरे हिज्र में हँसते भी हैं गाते भी
कैसी वहशत है जो मिल कर रोते हैं
हम को तो कुछ मछुआरे बतलाते हैं
झीलें, दरिया और समुंदर रोते हैं
कुछ लोगों पर होती है रब की नेमत
कि़स्मत वाले हैं जो खुलकर रोते हैं
रोना फ़न है जबसे ये मालूम पड़ा
रोने वाले हम से बेहतर रोते हैं
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