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लाख समझाते रहें उस को ज़माने वाले
आदमी कुछ न करे दिल पे असर होने तक
आदमी कुछ न करे दिल पे असर होने तक
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सब रंज ओ ग़म भी गुम थे जब मिरे साथ तुम थे
वो दौर था हमारा कितना हँसी ख़ुशी का
वो दौर था हमारा कितना हँसी ख़ुशी का
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मिरा इलाज अगर चारा-गर के पास नहीं
यक़ी है रब पे मुझे मैं जरा उदास नहीं
यक़ी है रब पे मुझे मैं जरा उदास नहीं
हमारे दिल को तिरी रूह से मोहब्बत है
हमारे इश्क़ में शामिल बदन की प्यास नहीं
यहाँ के लोग तो अब ख़ून पीने वाले हैं
यहाँ किसी को भी पानी की कोई प्यास नहीं
न जाने क्यूँ मुझे दिन-रात याद आता है
वो जिस का साया भी अब मेरे आस-पास नहीं
नसीब वाले हो जो तुम ने पा लिया उस को
ये इश्क़ सैफ मियाँ हर किसी को रास नहीं
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