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गुड़िया! बोलो
गुड़िय! अपनी आँखें खोलो
गुड़िय! अपनी आँखें खोलो
गुड़िया! दिल पे बोझ है कोई
तो जितना जी चाहे रो लो
गुड़िया! ये ख़ामोशी मुझ को काट रही है
गुड़िया! मौत की दीमक मुझ को चाट रही है
Read Fullतो जितना जी चाहे रो लो
गुड़िया! ये ख़ामोशी मुझ को काट रही है
गुड़िया! मौत की दीमक मुझ को चाट रही है
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वक़्त और ना-वक़्त के मा-बैन
कितना फ़ासला
कितना फ़ासला
कितना ख़ला
कितनी घनेरी ख़ामुशी है
जानने की कोशिशों में
आँख की और दिल की उजली आँख की
बीनाइयाँ कम पड़ गई हैं
सोचता हूँ
सोच का कोई परिंदा भेज कर
इस हद्द-ए-ला-हद का
कोई अंदाज़ा कर लूँ
ख़ुद से कहता हूँ
तुझे मालूम है
ये काम सोचों के परिंदों का नहीं
तख़्ईल का है
जो परिंदा ग़ैब की इस झील का है
जिस में सब ना-दीदगाँ के
अक्स बनते रक़्स करते हैं
इन्ही ना-दीदगाँ में
वक़्त और ना-वक़्त के मा-बैन का
वो फ़ासला और वो ख़ला और वो घनेरी ख़ामुशी
भी हो तो क्या मालूम
बहते अक्स उन के ताइर-ए-तख़्ईल के शहपर से लिपटे साथ आ जाएँ
ये गहरे भेद मेरे हाथ आ जाएँ
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जानने की कोशिशों में
आँख की और दिल की उजली आँख की
बीनाइयाँ कम पड़ गई हैं
सोचता हूँ
सोच का कोई परिंदा भेज कर
इस हद्द-ए-ला-हद का
कोई अंदाज़ा कर लूँ
ख़ुद से कहता हूँ
तुझे मालूम है
ये काम सोचों के परिंदों का नहीं
तख़्ईल का है
जो परिंदा ग़ैब की इस झील का है
जिस में सब ना-दीदगाँ के
अक्स बनते रक़्स करते हैं
इन्ही ना-दीदगाँ में
वक़्त और ना-वक़्त के मा-बैन का
वो फ़ासला और वो ख़ला और वो घनेरी ख़ामुशी
भी हो तो क्या मालूम
बहते अक्स उन के ताइर-ए-तख़्ईल के शहपर से लिपटे साथ आ जाएँ
ये गहरे भेद मेरे हाथ आ जाएँ
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हमारे ग़म जुदा थे
क़र्या-ए-दिल की फ़ज़ा आब ओ हवा
क़र्या-ए-दिल की फ़ज़ा आब ओ हवा
मौसम जुदा थे
शाम तेरे जिस्म की दीवार से चिमटी हुई थी
मुझ को काली रात खाती थी
तुझे आवाज़ देती थी तिरे अंदर से उठती हूक
मुझ को भूक मेरी रूह से बाहर बुलाती थी
तुझे पाँव में पड़ती बेड़ियों का रोग लाहक़ था
मुझे आज़ादी पे शक था
तुझे अपनों ने अपने घेर का क़ैदी बनाया था
मुझे बे-रिश्तगी ने ज़ात का भेदी बनाया था
मुसलसल लीख पर गर्दिश में रहना नाचना
तेरा वतीरा था
मिरी इक अपनी दुनिया थी
मिरा अपना जज़ीरा था
कोई दरिया था अपने बीच
हम दोनों किनारे थे
अलग दो कहकशाएँ थीं
जहाँ के हम सितारे थे
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मुझ को काली रात खाती थी
तुझे आवाज़ देती थी तिरे अंदर से उठती हूक
मुझ को भूक मेरी रूह से बाहर बुलाती थी
तुझे पाँव में पड़ती बेड़ियों का रोग लाहक़ था
मुझे आज़ादी पे शक था
तुझे अपनों ने अपने घेर का क़ैदी बनाया था
मुझे बे-रिश्तगी ने ज़ात का भेदी बनाया था
मुसलसल लीख पर गर्दिश में रहना नाचना
तेरा वतीरा था
मिरी इक अपनी दुनिया थी
मिरा अपना जज़ीरा था
कोई दरिया था अपने बीच
हम दोनों किनारे थे
अलग दो कहकशाएँ थीं
जहाँ के हम सितारे थे
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नहीं मैं नहीं हूँ
किसी दूसरे ने मुझे ''मैं'' कहा है
किसी दूसरे ने मुझे ''मैं'' कहा है
तो में हो गया हूँ
नफ़स खींचता हूँ
मगर ज़िंदगी मेरी ख़्वाहिश नहीं है
मुझे ज़िंदगी ने चुना है
लिहाज़ा मिरे फ़ैसले ज़िंदगी कर रही
मैं रोता नहीं हूँ
मिरी आँख से ओस के फूल
ग़म की हवाएँ गिराती हैं
कलियाँ हँसी की
मिरे लब पे खिलती नहीं हैं
ख़ुशी की बहारें खिलाती हैं
ख़ुद आती जाती हैं दिल में तमन्नाएँ
मैं कब बुलाता हूँ
(मेरी कमाई
फ़क़त ना-रसाई है)
मैं ने मोहब्बत भी कब मुंतख़ब की है
उस ने मुझे अपनी फ़हरिस्त में लिख लिया है
मुझे ख़्वाब आते नहीं हैं
सो ख़्वाबों ने तय कर लिया है
कि आइंदा वो मेरी आँखों के बोसों से
कोसों के लम्बे सफ़र पर चलेंगे
नहीं मैं कवी भी नहीं हूँ
मुझे नज़्म लिखती है
मैं नज़्म लिखता नहीं हूँ
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मगर ज़िंदगी मेरी ख़्वाहिश नहीं है
मुझे ज़िंदगी ने चुना है
लिहाज़ा मिरे फ़ैसले ज़िंदगी कर रही
मैं रोता नहीं हूँ
मिरी आँख से ओस के फूल
ग़म की हवाएँ गिराती हैं
कलियाँ हँसी की
मिरे लब पे खिलती नहीं हैं
ख़ुशी की बहारें खिलाती हैं
ख़ुद आती जाती हैं दिल में तमन्नाएँ
मैं कब बुलाता हूँ
(मेरी कमाई
फ़क़त ना-रसाई है)
मैं ने मोहब्बत भी कब मुंतख़ब की है
उस ने मुझे अपनी फ़हरिस्त में लिख लिया है
मुझे ख़्वाब आते नहीं हैं
सो ख़्वाबों ने तय कर लिया है
कि आइंदा वो मेरी आँखों के बोसों से
कोसों के लम्बे सफ़र पर चलेंगे
नहीं मैं कवी भी नहीं हूँ
मुझे नज़्म लिखती है
मैं नज़्म लिखता नहीं हूँ
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नई नई सूरतें बदन पर उजालता हूँ
लहू से कैसे अजीब मंज़र निकालता हूँ
लहू से कैसे अजीब मंज़र निकालता हूँ
वो दिल में उतरें तो एक हो जाएँ रौशनी दें
धनक के रंगों को अपनी आँखों में डालता हूँ
ज़मीन तलवों से आ चिमटती है आग बन कर
हथेलियों पर जब आसमाँ को सँभालता हूँ
हवा में थोड़ा सा रंग उतरे सो इस लिए मैं
गुलाब की पत्तियाँ फ़ज़ा में उछालता हूँ
कोई नहीं था जो इस मुसलसल सदा को सुनता
ये मैं हूँ जो इस दिए को सूरज में ढालता हूँ
'तरीर' साँसों का रंग नीला हुआ तो जाना
ख़बर नहीं थी ये साँप हैं जिन को पालता हूँ
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