गर्मी-ए-ख़ुर्शेद का
एक नक़्श-ए-मुज़्तरिब
एक नक़्श-ए-मुज़्तरिब
रौज़न-ए-दीवार-ए-शब
ख़ुश-अदा पुर-कार है
नूर से सरशार है
सैल-ए-मौज-ए-शहर में
वो उतरने को है अब
ख़ैर-मक़्दम के लिए
जागते हैं चश्म-ओ-लब
मेरी ख़ातिर शहर में
वो फ़रोज़ाँ जिस्म-ओ-जाँ
वो दरख़्शाँ पैरहन
वो सुनहरा बाँकपन
शो'ला-ए-तनवीर है
ख़ून में तहलील है
सुब्ह की तस्वीर है
उस का रू-ए-शादमाँ
हश्र के हंगाम तक
मेरे दिल में जावेदाँ
Read Fullख़ुश-अदा पुर-कार है
नूर से सरशार है
सैल-ए-मौज-ए-शहर में
वो उतरने को है अब
ख़ैर-मक़्दम के लिए
जागते हैं चश्म-ओ-लब
मेरी ख़ातिर शहर में
वो फ़रोज़ाँ जिस्म-ओ-जाँ
वो दरख़्शाँ पैरहन
वो सुनहरा बाँकपन
शो'ला-ए-तनवीर है
ख़ून में तहलील है
सुब्ह की तस्वीर है
उस का रू-ए-शादमाँ
हश्र के हंगाम तक
मेरे दिल में जावेदाँ
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खोया खोया उदास सा होगा
तुम से वो शख़्स जब मिला होगा
तुम से वो शख़्स जब मिला होगा
क़ुर्ब का ज़िक्र जब चला होगा
दरमियाँ कोई फ़ासला होगा
रूह से रूह हो चुकी बद-ज़न
जिस्म से जिस्म कब जुदा होगा
फिर बुलाया है उस ने ख़त लिख कर
सामने कोई मसअला होगा
हर हिमाक़त पे सोचते थे हम
अक़्ल का और मरहला होगा
घर में सब लोग सो रहे होंगे
फूल आँगन में जल चुका होगा
कल की बातें करोगे जब लोगों
ख़ौफ़ सा दिल में रूनुमा होगा
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