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Ambreen Haseeb Ambar

Top 10 of Ambreen Haseeb Ambar

Ambreen Haseeb Ambar

Top 10 of Ambreen Haseeb Ambar

    ज़मीं पे इंसाँ ख़ुदा बना था वबास पहले
    वो ख़ुद को सब कुछ समझ रहा था वबास पहले

    पलक झपकते ही सारा मंज़र बदल गया है
    यहाँ तो मेला लगा हुआ था वबास पहले

    तुम आज हाथों से दूरियाँ नापते हो सोचो
    दिलों में किस दर्जा फ़ासला था वबास पहले

    अजीब सी दौड़ में सब ऐसे लगे हुए थे
    मकाँ मकीनों को ढूँढ़ता था वबास पहले

    हम आज ख़ल्वत में इस ज़माने को रो रहे हैं
    वो जिस से सब को बहुत गिला था वबास पहले

    न जाने क्यूँ आ गया दुआ में मिरी वो बच्चा
    सड़क पे जो फूल बेचता था वबास पहले

    दुआ को उट्ठे हैं हाथ 'अंबर' तो ध्यान आया
    ये आसमाँ सुर्ख़ हो चुका था वबास पहले
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    Ambreen Haseeb Ambar
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    ज़िंदगी-भर एक ही कार-ए-हुनर करते रहे
    इक घरौंदा रेत का था जिस को घर करते रहे

    हम को भी मा'लूम था अंजाम क्या होगा मगर
    शहर-ए-कूफ़ा की तरफ़ हम भी सफ़र करते रहे

    उड़ गए सारे परिंदे मौसमों की चाह में
    इंतिज़ार उन का मगर बूढे शजर करते रहे

    यूँ तो हम भी कौन सा ज़िंदा रहे इस शहर में
    ज़िंदा होने की अदाकारी मगर करते रहे

    आँख रह तकती रही दिल उस को समझाता रहा
    अपना अपना काम दोनों उम्र-भर करते रहे

    इक नहीं का ख़ौफ़ था सो हम ने पूछा ही नहीं
    याद क्या हम को भी वो दीवार-ओ-दर करते रहे
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    Ambreen Haseeb Ambar
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    ध्यान में आ कर बैठ गए हो तुम भी ना
    मुझे मुसलसल देख रहे हो तुम भी ना

    दे जाते हो मुझ को कितने रंग नए
    जैसे पहली बार मिले हो तुम भी ना

    हर मंज़र में अब हम दोनों होते हैं
    मुझ में ऐसे आन बसे हो तुम भी ना
    इश्क़ ने यूँ दोनों को आमेज़ किया
    अब तो तुम भी कह देते हो तुम भी ना

    ख़ुद ही कहो अब कैसे सँवर सकती हूँ मैं
    आईने में तुम होते हो तुम भी ना

    बन के हँसी होंटों पर भी रहते हो
    अश्कों में भी तुम बहते हो तुम भी ना

    मेरी बंद आँखें तुम पढ़ लेते हो
    मुझ को इतना जान चुके हो तुम भी ना

    माँग रहे हो रुख़्सत और अब ख़ुद ही
    हाथ में हाथ लिए बैठे हो तुम भी ना
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    Ambreen Haseeb Ambar
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    तुम ने किस कैफ़ियत में मुख़ातब किया
    कैफ़ देता रहा लफ़्ज़-ए-'तू' देर तक
    Ambreen Haseeb Ambar
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    वो जंग जिस में मुक़ाबिल रहे ज़मीर मिरा
    मुझे वो जीत भी 'अंबर' न होगी हार से कम
    Ambreen Haseeb Ambar
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    उम्र-भर के सज्दों से मिल नहीं सकी जन्नत
    ख़ुल्द से निकलने को इक गुनाह काफ़ी है
    Ambreen Haseeb Ambar
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    हम तो सुनते थे कि मिल जाते हैं बिछड़े हुए लोग
    तू जो बिछड़ा है तो क्या वक़्त ने गर्दिश नहीं की
    Ambreen Haseeb Ambar
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    तअल्लुक़ जो भी रक्खो सोच लेना
    कि हम रिश्ता निभाना जानते हैं
    Ambreen Haseeb Ambar
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    मुझ में अब मैं नहीं रही बाक़ी
    मैं ने चाहा है इस क़दर तुम को
    Ambreen Haseeb Ambar
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    फ़ैसला बिछड़ने का कर लिया है जब तुम ने
    फिर मिरी तमन्ना क्या फिर मिरी इजाज़त क्यूँ
    Ambreen Haseeb Ambar
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Shahzad AhmadShahzad AhmadVarun AnandVarun AnandAjay SahaabAjay SahaabTahir FarazTahir FarazAmit Sharma MeetAmit Sharma MeetLiaqat JafriLiaqat JafriFarhat Abbas ShahFarhat Abbas ShahAmeer MinaiAmeer MinaiAda JafareyAda JafareyAmeeq HanafiAmeeq Hanafi