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इक नहीं पल इश्क़ में बेज़ार अपना
जीना क्यूँ जिस्मों बिना दुश्वार अपना
जीना क्यूँ जिस्मों बिना दुश्वार अपना
है फ़ज़ा' ओ ज़ब्त बस यूँ जिस्म मेरा
प्यार मुझ को रखना है बस प्यार अपना
आके मिल जा यूँ के रूहें इक हो जाएँ
जिस्म तो मरने को है तैयार अपना
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