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Mohammad Maashir Raza 'Qabeeh'

Top 10 of Mohammad Maashir Raza 'Qabeeh'

Mohammad Maashir Raza 'Qabeeh'

Top 10 of Mohammad Maashir Raza 'Qabeeh'

    हिस्से मिरे वो रात आया ही नहीं
    मेरे कभी वो हात आया ही नहीं
    Mohammad Maashir Raza 'Qabeeh'
    10
    1 Like
    उस के लिए कानों का झुमका लाया था मैं शहर से
    लेकिन उसे देने कि भी हिम्मत नहीं होती मुझे
    Mohammad Maashir Raza 'Qabeeh'
    9
    1 Like
    नहीं मैं जानता नूर-ए-बसर था ज़हर आँखों में
    उसे ऐसे रहा मैं देख जैसे क़हर आँखों में

    नहीं देखा मैं आँखों के अलावा और कुछ फिर भी
    मुझे कोई तो बतलाए था कैसा ज़हर आँखों में

    मैं तो देखा था मुस्तक़बिल उसी शादाब आँखों में
    दिखा भी तो नहीं कैसे बसा था शहर आँखों में

    समुंदर जैसी ही मुझ को दिखी आँखों की गहराई
    सुना आवाज़ जोरों से था जैसे लहर आँखों में

    मुझे कोई तो बतलाए था क्या हाथों में भी उस के
    रहा मैं देखता उसकों मोहब्बत दहर आँखों में
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    Mohammad Maashir Raza 'Qabeeh'
    8
    1 Like
    कोई हम को आज़माया हम किसी को आज़माए
    ज़िंदगी दो की तो गुज़री आज़माते आज़माते
    Mohammad Maashir Raza 'Qabeeh'
    7
    2 Likes
    फ़ासलों का ही था वो दीवार कैसे तोड़ सकते
    ईश्क ना होता तो टूटे दिल को कैसे जोड़ सकते
    Mohammad Maashir Raza 'Qabeeh'
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    1 Like
    चाह कर के भी तुझे मैं ये बता सकता नहीं
    है मुझे तुझ से मोहब्बत भी जता सकता नहीं

    मैं लिए फिरता हूँ नाकामी मोहब्बत में मगर
    आशिक़ी में तो निकम्मा मैं बता सकता नहीं
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    Mohammad Maashir Raza 'Qabeeh'
    5
    1 Like
    मुझ को उस ने तो पलट कर भी ना देखा
    जो मोहब्बत का कभी दा'वा था करता
    Mohammad Maashir Raza 'Qabeeh'
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    1 Like
    हिज्र की वो रात थी और रात भर सोया नहीं
    जिस पे मरता था मिरे मरने पे वो रोया नहीं

    आस्तीं से पोछता आँसू रहा हर बार मैं
    कोई इकलौती नहीं थी वो जिसे खोया नहीं
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    Mohammad Maashir Raza 'Qabeeh'
    3
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    हर बात वो कह दी छुपाया कुछ नहीं
    हर बात कह कर भी बताया कुछ नहीं

    हर वक़्त वो कहती ख़िलाफ़-ए-क़ाइदा
    हर बार कह कर भी सिखाया कुछ नहीं

    कहती रही कैसे गुज़ारें ज़िंदगी
    वो सिर्फ़ कहती थी दिखाया कुछ नहीं

    मैं मानता हूँ मैं बुरा तो हूँ मगर
    उस ने किसी को तो बताया कुछ नहीं

    मशकूर तो हूँ छोड़ जाने का मगर
    उस ने मुझे भी तो जताया कुछ नहीं
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    Mohammad Maashir Raza 'Qabeeh'
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    1 Like
    वो छोड़ कर तन्हा हमें जो चल दिया
    हम भी चले ख़ुद को इकहरा छोड़ कर
    Mohammad Maashir Raza 'Qabeeh'
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