हमने अपने हक़ की मय क्या माँग ली
    मयकदे हम से ख़फ़ा रहने लगे

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    बाज़ बनना है तो फ़िर कद भूल जा
    आँख में रख लक्ष्य और हद भूल जा

    किसलिए डरता है दीवारों से तू
    आसमांँ को देख सरहद भूल जा

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    बेबसी है बेकसी है बेदिली है ज़िंदगी
    बस यूँ ही जीते रहे तो ख़ुदकुशी है ज़िंदगी

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    हर क़दम हर साँस गिरवी ज़िंदगी रहम-ओ-करम
    इतने एहसानों पे जीने से तो मर जाना सही

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    सताना रूठ जाना और मनाना इश्क़ है लेकिन
    अगर हद से ज़ियादा हो तो रिश्ते टूट जाते हैं

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    हमारे दिल ने पुकारा है अब चले आओ
    ज़बाँ पे नाम तुम्हारा है अब चले आओ

    फ़ज़ा में दर्द का मंज़र है रात काली है
    अजीब हाल हमारा है अब चले आओ

    हमारे पास भला और है ही क्या सोचो
    बस एक ही तो सहारा है अब चले आओ

    तुम्हारे बाद तुम्हारी हसीन यादों में
    हर एक लम्हा गुज़ारा है अब चले आओ

    ख़राब हाल ये कश्ती है डूब जाएगी
    तुम्हारा साथ किनारा है अब चले आओ

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    सौ ज़ख़्म दिल पे हैं मेरे सौ ज़ख़्म मेरी जाँ
    क्या एक-एक दिल मेरा दिखलाए आपको

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    तन्हाई में अक्सर हद से गुजरती है
    जीने नहीं देती यादों की पुरवाई

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    इश्क़ वाली गमज़दा या दोस्ती वाली करें
    हम सुखनवर हैं बताओ शायरी कैसी करें

    बच गये तो ज़िंदगी लाचार कर देगी तुम्हें
    इसलिये मरने से पहले मौत को राजी करें

    मेरा दिल मेरी शिकायत मेरे दुःख मेरी सज़ा
    आपको क्या ही पड़ी है आप बस जी जी करें

    बाद-ए-रुसवाई कोई गम ही नहीं रुसवाई का
    जी में आता है की अब रुस्वा हर इक हस्ती करें

    ऐ मोहब्बत तुझसे क्यों भरता नहीं आख़िर ये दिल
    कितना दिल को दर्द दें और कितना दिल ज़ख़्मी करें

    हिज्र की दीवार पर तस्वीर है इक हिज्र की
    सोचते हैं बारहा सीधी करें उल्टी करें

    वो जिंहोने ख़्वाहिशें पे ख़्वाहिशें तस्लीम की
    ज़िंदगी अच्छी कटेगी ख़्वाहिशें छोटी करें

    हम को अब हमसे निकलने में लगेगा वक़्त कुछ
    छोड़ दें हमको हमारे हाल बस इतनी करें

    दिल दुखाकर बोलते हैं कितने दिल जूँ लोग हैं
    जाने वाले अब तुम्हारी फ़िक्र भी कितनी करें

    दर्द ही बस दर्द और इसके अलावा कुछ नहीं
    अब करें तो क्या करें क्या दर्द की खेती करें

    धीरे धीरे जल रहा है कुछ तमाम आज़ी कहीं
    इससे पहले ख़ाक हो जाएँ शिफ़ा जल्दी करें

    Ajeetendra Aazi Tamaam
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    गुमान हमको नहीं अपनी शख़्सियत पे मगर
    जो हमसे दुश्मनी करते तो सर गये होते

    Ajeetendra Aazi Tamaam
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