@aazitamaam
Aazi Tamaam shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Aazi Tamaam's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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बड़े जतन के बाद बनी है मेरी सहेली तन्हाई
इक दूजे में ख़ुश रहते हैं मैं और मेरी तन्हाई
हर घड़ी इस ज़ेहन-ओ-दिल में गुफ़्तगू क्या है
कोई समझाए हमें ये जुस्तुजू क्या है
वैसे ही तो ये साहिब-ए-मसनद
मुल्क के जाँ पनाह लगते हैं
जैसे कुछ बैठे लड़के बाइक पर
हू-ब-हू बादशाह लगते हैं
मिलते बिछड़ते रहते हैं हर मोड़ पर हमें
हम जैसे कोई रेल सवारी ये रास्ते
बाइक पे अपनी बैठ निकलते हैं घर से जब
रफ़्तार देखते हैं हमारी ये रास्ते
हज़ारों ख़्वाहिशें काग़ज़ पे ही दम तोड़ देती हैं
है स्याही सुर्ख़ फिर अपनी क़लम है ख़ूँ-चकाँ अपना
फैली हुई हैं गाँव में ख़ुशियों की ख़ुश्बुएँ
चूल्हों पे आज फिर हैं पतीले चढ़े हुए
काट कर खाने का है अपना मज़ा
चूस कर खाने में बात इक और है
आम का राजा है अल्फांसो अगर
तो दशहरी की सिफ़ात इक और है
हर शय पे दस्तकारियाँ करते हो बे-मिसाल
बख़्शा है रब ने आपको दस्त-ए-हुनर कमाल
पढ़ते हैं जो ये लोग अदाकारिओं के साथ
क्या हर्फ़-ए-इस्तिजाबी के जैसे रहे हैं हम
भले हों ख़ून के रिश्ते या दुनिया के फ़रिश्ते हों
ग़म-ए-ग़ुर्बत के मारों को सहारा कौन देता है
रहती है कितनी शान से जर्जर मकान में
शर्म-ओ-हया को ओढ़ के लड़की ग़रीब की
रहे सरहद का सैनिक जोश में ये सोच कर हर पल
खड़ा हूँ मैं सुरक्षित अब मेरा अपना वतन होगा
न बच पाए कोई दुश्मन भले ये जाँ चली जाए
मेरी क़िस्मत में भी इक दिन तिरंगे का कफ़न होगा
हुआ है वक़्त का हम पर करम ये
ज़रा सा ज़ख़्म दिल का सिल गया है
गँवा कर अपनी कश्ती सोचते हैं
ग़नीमत है किनारा मिल गया है
किया कर जिस्म की अपने हिफ़ाज़त
ये मिट्टी रूह का घर है मेरी जाँ
गिला कैसा जहाँ रुस्वा करे गर
ये दुनिया तो सितमगर है मेरी जाँ
रहते हैं अपने आप से कुछ बे-ख़बर से हम
जब से हुए हैं रू-ब-रू दर्द-ए-जिगर से हम