आशिक़ों के सीनों में होने चाहिए दो दिल
एक हो ही जाता है ज़ाया' टूट जाने में
एक हो ही जाता है ज़ाया' टूट जाने में
8
1 Like
सहराओं से उत्कट रवानी की तरफ़
मैं चल दिया हूँ आज पानी की तरफ़
मैं चल दिया हूँ आज पानी की तरफ़
हाथों से बजरी सा फिसलता जा रहा
है बढ़ रहा बचपन जवानी की तरफ़
ये उम्र ही तो है मोहब्बत करने की
मैं जा रहा हूँ इक दिवानी की तरफ़
दौलत की जिस-जिस को भी ताक़त मिल गई
वो बढ़ रहा है हुक्मरानी की तरफ़
हम इम्तिहाँ भी ले चुके हैं उस का और
अब बढ़ना होगा जावेदानी की तरफ़
अब मुल्क में ग़ुर्बत भी छाने वाली है
है ही नहीं कोई किसानी की तरफ़
इंसानियत का मरना तो ज़ाहिर ही है
सब जा रहे हैं बद-गुमानी की तरफ़
जो सुन के दिल महसूस कर पाए चलो
इक ऐसी ही अफ़ज़ल कहानी की तरफ़
5
6 Likes
जब से उन से दुआ-सलाम हो गया
मेरी ख़ल्वत का इंतिज़ाम हो गया
मेरी ख़ल्वत का इंतिज़ाम हो गया
मुझ से कहता था दिल वफ़ा निभाऊँगा
अब किसी और का ग़ुलाम हो गया
जो हमारी नमक-हलाली करता था
आज वो ही नमक-हराम हो गया
पहले आती थी याद वो कभी-कभी
सिलसिला अब ये सुब्ह-ओ-शाम हो गया
मैं मोहब्बत में सरफ़राज़ था कभी
बैर कर के मैं शख़्स-ए-आम हो गया
हार कर इश्क़ में हयात बार-बार
मिस्ल-ए-फ़रहाद-ओ-क़ैस नाम हो गया
पहले तो दुनिया में मिरा कोई न था
फिर 'मिलन' आलम-ए-तमाम हो गया
4
6 Likes
दिलबर-ओ-दिलदार में काफ़ी फ़र्क़ है
जैसे इश्क़ और प्यार में काफ़ी फ़र्क़ है
जैसे इश्क़ और प्यार में काफ़ी फ़र्क़ है
लड़कियाँ आँखों से ही कर सकती हैं क़त्ल
हुस्न और तलवार में काफ़ी फ़र्क़ है
3
8 Likes
इश्क़ उस से ही करूँगा मेरे मर जाने तक
वो मेरा हो या न हो उम्र गुज़र जाने तक
वो मेरा हो या न हो उम्र गुज़र जाने तक
2
7 Likes
1
7 Likes










