0
  • Search
  • Shayari
  • Writers
  • Events
  • Blog
  • Store
  • Leaderboard
  • Login
0
HomeExplore
Submit
LibraryProfile
Maher painter 'Musavvir'

Top 10 of Maher painter 'Musavvir'

Maher painter 'Musavvir'

Top 10 of Maher painter 'Musavvir'

    आज सबने यही बस सुनाया हमें
    आप पैदा हुए आप का शुक्रिया
    Maher painter 'Musavvir'
    10
    1 Like
    है गुहर हाथों में उस के साँस लेकिन रुक गई
    इक गुहर के वास्ते दूजी गुहर खोनी पड़ी
    Maher painter 'Musavvir'
    9
    0 Likes
    गुलाब तोड़ के मेरी चमन में साँझ हुई
    तिरे फ़िराक़ में गुलशन की गोद बाँझ हुई
    Maher painter 'Musavvir'
    8
    1 Like
    प्यादों के रंग अलग है मगर जाएँगे सभी
    शतरंज ख़त्म होने पे बक्से में एक ही
    Maher painter 'Musavvir'
    7
    2 Likes
    बहाने मिलने के शायद न रोज़ रोज़ मिलें
    किताब माँग लिया कर कभी कभी उस से
    Maher painter 'Musavvir'
    6
    17 Likes
    जान पहचान किसी से भी बनाएँ हम क्यूँ
    चार लोगों का भला बोझ बढ़ाएंँ हम क्यूँ

    बात लफ़्ज़ों में कभी तुम भी समझ लेना अब
    बात सारी ही इशारों में बताएंँ हम क्यूँ

    ये तमीज़ आप को थोड़ी बहुत आती होगी
    आप को सामने से रोज़ बलाएँ हम क्यूँ

    फ़र्क पड़ता नहीं फूलों को तिरे आने से
    बाग़ में ऐसे गुलों को फिर उगाएंँ हम क्यूँ

    क़ाबिल ए दार हमारे भी अलावा हैं बहुत
    सिर्फ़ ख़ुद को ही गुनहगार गिनाएंँ हम क्यूँ

    है ज़बान आप के मुँह में भी तो कुछ बोलो ना
    हर दफ़ा आप की आवाज़ उठाएँ हम क्यूँ

    और भी रंज हैं और दर्द ज़माने में भरे
    बस मुहब्बत की ही ग़ज़लों को सुनाएँ हम क्यूँ
    Read Full
    Maher painter 'Musavvir'
    5
    0 Likes
    शा'इरी इक अजीब फ़न तो है
    हम में थोड़ा सा बाँकपन तो है

    क्या हुआ गर नहीं है साथ तेरा
    मेरे घर में अकेलापन तो है

    फ़र्क़ क्या है अगर नहीं संगीत
    बेड़ियों की खनन खनन तो है

    मुल्क अपना महान है अब भी
    चाहे बंजर है पर चमन तो है

    फिर मुहब्बत नहीं करेंगे हम
    दिल नहीं मानता प मन तो है

    ज़िंदगी में मज़ा नहीं लेकिन
    सिर्फ़ थोड़ा बहुत सुखन तो है

    गुल-बदन होने का सबूत है ये
    उस के छूने में इक चुभन तो है

    ज़ुल्म सहते हुए ही सोना है तो
    नहीं कंबल तो क्या कफ़न तो है
    Read Full
    Maher painter 'Musavvir'
    4
    1 Like
    सुनाना चाहता हूँ चुटकुले हमशक्ल को अपने
    मुझे इक बार ख़ुद को मुस्कुराते देखना है बस
    Maher painter 'Musavvir'
    3
    2 Likes
    मुझे कभी भी मुहब्बत समझ नहीं आई
    पर उस से ज़्यादा तो नफ़रत समझ नहीं आई

    नशीन तख़्त पे हो, मुफ़्लिसों से तेवर हैं
    मुझे तुम्हारी सियासत समझ नहीं आई

    गुनाहगार नहीं, आम लोग क़ैद में है
    भला ये कैसी हिफ़ाज़त, समझ नहीं आई

    गुलों के साथ ये पानी पिलाए कांँटो को
    ये बाग़बां की शराफ़त समझ नहीं आई

    तुम्हें ये ख़्वाब हमारा समझ नहीं आया
    हमें तुम्हारी हक़ीक़त समझ नहीं आई

    रगों से मर्द की औरत हर एक वाकिफ़ है
    किसी भी मर्द को औरत समझ नहीं आई

    वो शख़्स जिस को मुहब्बत हुई न हो तुम से
    उसे ख़ुदा की करामत समझ नहीं आई
    Read Full
    Maher painter 'Musavvir'
    2
    4 Likes
    महफ़िल में जब ग़ज़लें मेरी होती है
    ख़ुस-फ़ुस ख़ुस-फ़ुस बातें तेरी होती है

    इतना नशा है उस की दोनो आँखों में
    उस काजल की हेरा-फेरी होती है

    चूमना उस को काम हो जैसे सरकारी
    सरकारी कामों में देरी होती है

    छोड़ के फूलों को अब हर इक तितली भी
    बस उस के चहरे पे ठहरी होती है

    और सभी के साथ फ़कत गप्पे मारे
    तेरे साथ ही बातें गहरी होती है

    चूमा उस का माथा मैं ने भी ऐसे
    जैसे केक के ऊपर चेरी होती है

    मानो सूरज को बादल ने घेरा हो
    जब चेहरे पे ज़ुल्फ़ बिखेरी होती हैं

    डिज़्नी की परियों जैसा है प्यार अपना
    और लड़ाई टॉम एंड जेरी होती है
    Read Full
    Maher painter 'Musavvir'
    1
    5 Likes
nakul kumarnakul kumarWaseem SiddharthnagariWaseem SiddharthnagariYaduvanshi AbhishekYaduvanshi AbhishekNityanand VajpayeeNityanand VajpayeeAdnan Ali SHAGAFAdnan Ali SHAGAFPritPritAvinash bhartiAvinash bhartiGanesh gorakhpuriGanesh gorakhpuriPrashant PrakharPrashant PrakharHarsh KumarHarsh Kumar