10
1 Like
7
1 Like
रात भर ये तू जो महफ़िल है सजाता
सुब्ह फिर ग़मगीन होकर ये बताता
सुब्ह फिर ग़मगीन होकर ये बताता
देख ख़ुशियाँ तू तो ज़ीरो की मनाता
ज़ीरो का है ग़म ये सारा फिर जताता
5
2 Likes
मंज़िल कभी भी आख़िरी होती नहीं
इच्छा सभी पूरी मेरी होती नहीं
इच्छा सभी पूरी मेरी होती नहीं
इज़हार करना इश्क़ का तो है तुझे
वो सोचने से तो तेरी होती नहीं
3
1 Like










