जब रात की नागिन डसती है
नस नस में ज़हर उतरता है
जब चाँद की किरनें तेज़ी से
उस दिल को चीर के आती हैं
जब आँख के अंदर ही आँसू
सब जज़्बों पर छा जाते हो
तब याद बहुत तुम आते हो
जब दर्द की झानजर बजती है
जब रक़्स ग़मों का होता है
ख़्वाबों की ताल पे सारे दुख
वहशत के साज़ बजाते हैं
गाते हैं ख़्वाहिश की लय में
मस्ती में झूमते जाते हैं
सब जज़्बों पर छा जाते हो
तब याद बहुत तुम आते हो
— Wasi Shah















