"ख़्वाब नहीं देखा"

मैं ने मुद्दत से कोई ख़्वाब नहीं देखा है
रात खिलने का गुलाबों से महक आने का
ओस की बूंदों में सूरज के समा जाने का
चाँद सी मिट्टी के ज़र्रों से सदा आने का
शहर से दूर किसी गाँव में रह जाने का
खेत खलियानों में बाग़ों में कहीं गाने का
सुब्ह घर छोड़ने का देर से घर आने का
बहते झरनों की खनकती हुई आवाज़ों का
चहचहाती हुई चिड़ियों से लदी शाख़ों का
नर्गिसी आँखों में हँसती हुई नादानी का
मुस्कुराते हुए चेहरे की ग़ज़ल ख़्वानी का
तेरा हो जाने तिरे प्यार में खो जाने का
तेरा कहलाने का तेरा ही नज़र आने का
मैं ने मुद्दत से कोई ख़्वाब नहीं देखा है
हाथ रख दे मिरी आँखों पे कि नींद आ जाए

— Waseem Barelvi

More by Waseem Barelvi

Other nazm from the same pen

See all from Waseem Barelvi →

Eid Shayari Collection

Shers of eid shayari collection.

All Eid Shayari Collection poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling