"सूखे हुए बेले"
तुम ने सूखे हुए बेले भी कभी सूँघे हैं
इन को मसला न करो
कितनी आज़ुर्दा मगर भीनी महक देते हैं
इन को फेंका न करो
गर्द-आलूद बुझे चेहरों को समझा भी करो
सिर्फ़ देखा न करो
हाथ के छालों का गट्ठों का मुदावा भी करो
सिर्फ़ छेड़ा न करो
तुम ने सूखे हुए बेले भी कभी सूँघे हैं
— Wamiq Jaunpuri















