है कठिन राह तुम इस पे चलना नहींचाँद होना मगर सुब्ह ढलना नहींहर गुलाब एक दिन यूँ तो मुरझाएगातुम मगर यूँ फजा संग बदलना नहीं— Kavi Vikash Shukla