"उस की ख़ुशियाँ"

सारी झीलें सूख गई हैं
उस की आँखें सूख गई हैं
पेड़ों पर पंछी भी चुप हैं
उस को कोई दुख है शायद
रस्ते सूने सूने हैं सब
उस ने टहलना छोड़ दिया है
सारी ग़ज़लें बेमानी हैं
उस ने पढ़ना छोड़ दिया है
वो भी हँसना भूल चुकी है
गुलों ने खिलना छोड़ दिया है
सावन का मौसम जारी है
या'नी उस का ग़म जारी है
बाक़ी मौसम टाल दिए हैं
सुख कूएँ में डाल दिए हैं
चाँद को छुट्टी दे दी गई है
तारों को मद्धम रक्खा है
आतिश-दान में फेंक दी ख़ुशियाँ
दिल में बस इक ग़म रक्खा है
खाना पीना छोड़ दिया है
सब से रिश्ता तोड़ दिया है
हाए क़यामत आने को है
उस ने जीना छोड़ दिया है
हर दिल ख़ुश हर चेहरा ख़ुश हो
वो हो ख़ुश तो दुनिया ख़ुश हो
वो अच्छी तो सब अच्छा है
और दुनिया में क्या रक्खा है
ये सब सुन कर ख़ुदा ने बोला
बोल तेरी अब ख़्वाहिश क्या है
मैं ने बोला मेरी ख़्वाहिश
मेरी ख़्वाहिश उस की ख़ुशियाँ
ख़ुदा ने बोला तेरी ख़्वाहिश
मैं फिर बोला उस की ख़ुशियाँ
इस के अलावा पूछ रहा हूँ
मैं ने बोला उस की ख़ुशियाँ
अपने लिए कुछ माँग ले पगले
माँग लिया ना उस की ख़ुशियाँ
उस की ख़ुशियाँ उस की ख़ुशियाँ
उस की ख़ुशियाँ उस की ख़ुशियाँ

— Varun Anand

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