Unknown
Unknown
Nazm

बनाया है हम ने ये लकड़ी का घोड़ा

सड़ा-सड़ सड़ा-सड़ लगाते हैं कोड़ा
ये करता नहीं भूल कर भी कभी हट
जिधर चाहा फेरा जिधर चाहा मोड़ा
ये खाता नहीं ठोकरें रास्ते में
बला से अगर हो कोई ईंट रोड़ा
न ये मारता है दोलत्ती किसी के
किसी का नहीं इस ने मुँह हाथ तोड़ा
न इस ने कभी मुझ को अब तक गिराया
न भागा न हरगिज़ मिरा साथ छोड़ा
नहीं घास दाने की भी इस को हाजत
हवा खा के जीता है मेरा ये घोड़ा
कमर इस की लगती नहीं बैठने से
निकलता नहीं है कोई फुंसी फोड़ा
मैं चढ़ता हूँ रोज़ इस पे कपड़े बदल कर
नया मेरा घोड़ा नया मेरा जोड़ा
चला-चल मिरे घोड़े सीधा चला चल
बहुत चल चुका अब तो रस्ता है थोड़ा

— Unknown

More by Unknown

Other nazm from the same pen

See all from Unknown →

Relationship Shayari Collection

Shers of relationship shayari collection.

All Relationship Shayari Collection poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling