चलो चराग़ बुझा कर ज़रा सा देखें हम
ये काएनात किसे ढूँडने निकलती है
सियाह रात की तारीकियाँ बताती हैं
कि सब उजाले घनी रात के मुसाफ़िर हैं
जो दिन के साथ सफ़र के लिए निकलते हैं
— Umar Farooq
ये काएनात किसे ढूँडने निकलती है
सियाह रात की तारीकियाँ बताती हैं
कि सब उजाले घनी रात के मुसाफ़िर हैं
जो दिन के साथ सफ़र के लिए निकलते हैं
Other nazm from the same pen
Shers of andhera.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling