दो लफ़्ज़ शा'इरी की बदल कर चुरा लियाबारात ला, रक़ीब ने अपना बना लियाचक्कर लगा लगा के भी मेरी नहीं हुईमंडप के सात फेरे से रिश्ता बना लिया— RAAHI