दश्त-ए-जाँ में
सलीब-ए-अना पर
लटकते हुए
सर-बुरीदा ख़यालात की
सिसकती हुई
सरगोशियों में
फ़ना और बक़ा
लम्हा-ए-तक़्सीम में
मुंजमिद हो चुके
ऐ मेरे ख़ुदा
— Tahir Hanfi
सलीब-ए-अना पर
लटकते हुए
सर-बुरीदा ख़यालात की
सिसकती हुई
सरगोशियों में
फ़ना और बक़ा
लम्हा-ए-तक़्सीम में
मुंजमिद हो चुके
ऐ मेरे ख़ुदा
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