वो अब हम सेे दूरी बनाने लगे हैंरक़ीबों की महफ़िल सजाने लगे हैंये शिकवे शिकायत करें भी तो किस सेसितम मेहरबाँ हम पे ढाने लगे हैं— shampa andaliib