"क्रिसमस का दरख़्त"

मैं भी हूँ गोया क्रिसमस का दरख़्त
मेरा रिश्ता भी ज़मीं से आसमाँ से और हवा से कट चुका
बाग़ छूटा खेतियाँ छूटीं
मैं घर के मरकज़ी कमरे में आ कर डट चुका
मेरे बच्चों ने सजाया है मुझे
रौशनी के नन्हे नन्हे बल्ब टाँके हैं मिरी बाँहों के साथ
मेरी शाख़ों में हैं तोहफ़े
मुख़्तलिफ़ रंगों के काग़ज़ और सुनहरे टेप में लिपटे हुए
है रक़म हर एक तोहफ़े पर कोई मानूस नाम
रात होगी और डिनर के बा'द मेरे पास सब आ जाएँगे
मेरी बीवी मेरे बच्चे मेरे दोस्त
मेरी शाख़ों से उतारे जाएँगे तोहफ़े तमाम
जागती सोई हुई गुड़िया
दमकती धारियों वाला फ़्राक
मेरे बेटे के लिए बंदूक़
जिस से वो करेगा उड़ती चिड़ियों का शिकार
मेरी बीवी के लिए नेकलेस चमकता पुर-वक़ार
और भी तोहफ़े बहुत से बे-शुमार
और बच्चों के लिए और अपने प्यारों के लिए
जब गुज़र जाएगी शब
बट चुकेंगे सारे तोहफ़े बुझ चुकेंगे बल्ब सब
मैं ड्राइंग-रूम की बे-कार शय हो जाऊँगा
मेरे सूखे ज़र्द-पत्तों की महक
जागती-जीती फ़ज़ा में कब तलक
फिर मिरी बीवी कहेगी
आओ बच्चो घर की ज़ेबाइश नए सिरे से करें
फेंक दें अब घर से बाहर ये क्रिसमस का दरख़्त
पत्ता पत्ता उस की हर इक शाख़ का मुरझा गया
अब नया साल आ गया

— Shahzad Ahmad

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