
कहने को जब बात ज़रूरी होती है
उस दम दिल की नामंजूरी होती है
दिल की धरती बंजर है जाने कब से
जाने क्यूँ बरसात अधूरी होती है
इक दूजे के आँसू पोंछ नहीं सकते
मजबूरी आख़िर मजबूरी होती है
— Saarthi Baidyanath
Other sher from the same pen
Shers of bebas.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling