ये समाँ और रात की जादूगरी
चाँद का ले कर चली हाथों में ताज
कुछ तिलिस्मी लोग पथराए हुए
कुछ तिलिस्मी लड़कियाँ जैसे तमन्नाओं के मोर
जिन से आ कर खेलती है रात की नीलम-परी
और जा कर नाचती है शाम तक
हर क़दम पर एक शहज़ादे की मौत
— Qamar Jameel
चाँद का ले कर चली हाथों में ताज
कुछ तिलिस्मी लोग पथराए हुए
कुछ तिलिस्मी लड़कियाँ जैसे तमन्नाओं के मोर
जिन से आ कर खेलती है रात की नीलम-परी
और जा कर नाचती है शाम तक
हर क़दम पर एक शहज़ादे की मौत
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