
नहीं मैं रह नहीं सकता यहीं मैं कह नहीं सकता
किनारा है तभी हूँ मैं नहीं तो बह नहीं सकता
पुरानी एक इमारत हूँ कि क्या देखा नहीं मैं ने
किसी के छोड़ जाने से तो मैं यूँ ढह नहीं सकता
— Praveen Bhardwaj
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