जिस दम चमन में चाँद की हों खु़श जमालियां
और झूमती हों बाग़ में फूलों की डालिया
बहती हों मैं के जोश से इश्रत की नालियां
कानों में नाज़नीं के झलकती हों बालियाँ
ऐशो तरब की धूम नशों की बहालियां
जब चांदनी की देखिए ! रातें उजालियां
बैठी हो चांदनी सी वो जो सुखऱ गुलइज़ार
और बादले का तन में झलकता है तार-तार
हाथों में गजरा, कान में गुच्छे, गले में हार
हर दम नशे में प्यार से हंस-हंस के बार-बार
हम छेड़ते हों उस को वो देती हो गालियां
जब चांदनी की देखिए ! रातें उजालियां
ऐसी ही चांदनी की बना कर वो फवन
चम्पाकली जड़ाऊं वो हीरे का नौ रतन
गहने से चांदनी के झमकता हो गुल बदन
और चाँद की झलक से वो गोरा सा उस का तन
दिखला रहा हो कुर्ता औ अंगिया की जालियां
जब चांदनी की देखिए ! रातें उजालियां
दी हो इधर तो चाँद ने और चांदनी बिछा
उधर वो चांदनी सा जो वो सुर्ख़ महलक़ा
मैं की गुलाबियां भी झलकती हों जा बजा
और नाज़नीं नशे में सुराही उठा-उठा
देती हो अपने हाथ से भर-भर के प्यालियां
जब चांदनी की देखिए ! रातें उजालियां
वो गुल-बदन कि हुस्न का जिस के मचा हो शोर
करती हो बैठी नाज़ से सौ चांदनी पे ज़ोर
छल्ले भी उँगलियों में झलकते हों पोर-पोर
हम भी हों पास शोख़ के ज्यूँ चाँद और चकोर
दोनों गले में प्यार से बाहें हों डालियां
जब चांदनी की देखिए ! रातें उजालियां
गुलशन में बिछ रहा हो रुपहला सा इक पलंग
होती हो उस पलंग उपर उल्फ़तों की जंग
उस वक़्त ऐसे होते हों ऐशो तरब के रंग
जो चांदनी में देखके इश्रत के रंग ढंग
मैं से भी झमकें ऐश की हों दिल में डालियां
जब चांदनी की देखिए ! रातें उजालियां
ईधर तो हुस्ने बाग़ उधर चाँद की झलक
ऊधर वो नाज़नीं भी नशे में रही चहक
देती हो बोसा प्यार से हरदम चहक-चहक
हर आन बैठती हो बग़ल में सरक-सरक
मुँह पै नशों की सुर्खि़यां आँखों में लालियां
जब चांदनी की देखिए ! रातें उजालियां
निखरा हो चाँद नूर में ढलती चली हो रात
फूलों की बास आती हो हरदम हवा के साथ
वो नाज़नीं कि चाँद भी होता है जिस से मात
बैठी हो सौ बनाव से डाले गले में हाथ
गाती हो और नशे में बजाती हो तालियां
जब चांदनी की देखिए ! रातें उजालियां
आ कर इधर तो चांदनी छिटकी हो दिल पज़ीर
और उस तरफ़ बग़ल में जो हो अचपली शरीर
दिल उस परी के नाज़ो अदा बीच हो असीर
ले शाम से सहर तईं ऐश हो ”नज़ीर“
सब दिल की हसरतें हों ख़ुशी से निकालियां
जब चांदनी की देखिए ! रातें उजालियां















