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Sazaa Shayari
सज़ा कितनी बड़ी है गाँव से बाहर निकलने की
मैं मिट्टी गूँधता था अब डबलरोटी बनाता हूँ
Munawwar Rana
20
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मुंसिफ़ हो अगर तुम तो कब इंसाफ़ करोगे
मुजरिम हैं अगर हम तो सज़ा क्यूँ नहीं देते
Ahmad Faraz
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मेरी बाँहों में बहकने की सज़ा भी सुन ले
अब बहुत देर में आज़ाद करूँगा तुझ को
Jaun Elia
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ये मय-कदा है यहाँ हैं गुनाह जाम-ब-दस्त
वो मदरसा है वो मस्जिद वहाँ मिलेगा सवाब
Ali Sardar Jafri
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उम्र-भर के सज्दों से मिल नहीं सकी जन्नत
ख़ुल्द से निकलने को इक गुनाह काफ़ी है
Ambreen Haseeb Ambar
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मुझ से क्या हो सका वफ़ा के सिवा
मुझ को मिलता भी क्या सज़ा के सिवा
Hafeez Jalandhari
15
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दिल में किसी के राह किए जा रहा हूँ मैं
कितना हसीं गुनाह किए जा रहा हूँ मैं
Jigar Moradabadi
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दर्द आँखों में आया उतर कर
इस तरह मैं ने ख़ुद को सज़ा दी
Lokesh Singh
13
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मुंसिफ़ सुनो तुम, उम्र-भर की ये सज़ा कम ही लगे
इंसान को मिल मुफ़लिसी, है ये सज़ा-ए-मौत ही
Zain Aalamgir
12
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हमारे कुछ गुनाहों की सज़ा भी साथ चलती है
हम अब तन्हा नहीं चलते दवा भी साथ चलती है
Munawwar Rana
11
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ख़ुद-कर्दा गुनाहों की सज़ा ढूंढ रहे हैं
अब चार सू हम ख़ौफ़े-ख़ुदा ढूंढ रहे हैं
A R Sahil "Aleeg"
10
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गुनाह-ए-इश्क़ ने सिखला दिया है ये हुनर भी देख
जनाज़ा भी मेरा ही और कांधा भी है ख़ुद का ही
A R Sahil "Aleeg"
9
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इश्क़ और भूक, क्या बताएँ
हर गुनाह का सबब यही दो
A R Sahil "Aleeg"
8
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अपने दामन को गुनाह से मैं बचा लूँगा
फिर ख़ुदा को रो-रो के इक दिन मना लूँगा
Sayeed Khan
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हिज्र मुझ पर अज़ाब ले आया
जबसे मालूम खु़श नहीं वो भी
Sayeed Khan
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इश्क़ करना इक सज़ा है क्या करें
इश्क़ का अपना मज़ा है क्या करें
Syed Naved Imam
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जन्नत में आ गया था किसी अप्सरा पे दिल
जिस की सज़ा-ए-मौत में दुनिया मिली मुझे
Ankit Maurya
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ख़ूब-सूरत ये मोहब्बत में सज़ा दी उस ने
फिर गले मिल के मेरी उम्र बढ़ा दी उस ने
Manzar Bhopali
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अपना पता मिले न ख़बर यार की मिले
दुश्मन को भी न ऐसी सज़ा प्यार की मिले
उन को ख़ुदा मिले, है ख़ुदा की जिन्हें तलाश
मुझ को बस इक झलक मेरे दिलदार की मिले
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Kaifi Azmi
2
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मुझ को मिरी शिकस्त की दोहरी सज़ा मिली
तुझ से बिछड़ के ज़िंदगी दुनिया से जा मिली
Saqi Faruqi
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Gunaah Shayari
Dard Shayari
Afsos Shayari
Zulm Shayari
Intiqam Shayari
Dhokha Shayari