दुनिया की फ़िक्र छोड़, न यूँ अब उदास बैठ
ये वक़्त रब की देन है, अम्मी के पास बैठ
शाम भी थी धुआँ धुआँ हुस्न भी था उदास उदास
दिल को कई कहानियाँ याद सी आ के रह गईं
खुद से भी मिल न सको, इतने पास मत होना
इश्क़ तो करना, मगर देवदास मत होना
देखना, चाहना, फिर माँगना, या खो देना
ये सारे खेल हैं, इनमें उदास मत होना
शहर का तब्दील होना शाद रहना और उदास
रौनक़ें जितनी यहाँ हैं औरतों के दम से हैं
तिरा ख़याल बहुत देर तक नहीं रहता
कोई मलाल बहुत देर तक नहीं रहता
उदास करती है अक्सर तुम्हारी याद मुझे
मगर ये हाल बहुत देर तक नहीं रहता
उसकी जुल्फ़ें उदास हो जाए
इस-क़दर रोशनी भी ठीक नहीं
तुमने नाराज़ होना छोड़ दिया
इतनी नाराज़गी भी ठीक नहीं
तो देख लेना हमारे बच्चों के बाल जल्दी सफ़ेद होंगे
हमारी छोड़ी हुई उदासी से सात नस्लें उदास होंगी
सुब्ह-ओ-शाम अब हमको बस उदास रहना है
ग़मज़दों की मंज़िल का रास्ता उदासी है
अब इन जले हुए जिस्मों पे ख़ुद ही साया करो
तुम्हें कहा था बता कर क़रीब आया करो
मैं उसके बाद महिनों उदास रहता हूँ
मज़ाक में भी मुझे हाथ मत लगाया करो
अब उदास फिरते हो सर्दियों की शामों में
इस तरह तो होता है इस तरह के कामों में