Muneer Niyazi

Muneer Niyazi

@muneer-niyazi

Muneer Niyazi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Muneer Niyazi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm

हम भी 'मुनीर' अब दुनिया-दारी कर के वक़्त गुज़ारेंगे
होते होते जीने के भी लाख बहाने आ जाते हैं

Muneer Niyazi

हम भी घर से 'मुनीर' तब निकले
बात अपनों की जब सही न गई

Muneer Niyazi

मोहब्बत अब नहीं होगी ये कुछ दिन बाद में होगी
गुज़र जाएँगे जब ये दिन ये उन की याद में होगी

Muneer Niyazi

कुछ वक़्त चाहते थे कि सोचें तिरे लिए
तूने वो वक़्त हम को ज़माने नहीं दिया

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ग़म की बारिश ने भी तेरे नक़्श को धोया नहीं
तूने मुझ को खो दिया मैंने तुझे खोया नहीं

Muneer Niyazi

मकाँ है क़ब्र जिसे लोग ख़ुद बनाते हैं
मैं अपने घर में हूँ या मैं किसी मज़ार में हूँ

Muneer Niyazi

ख़्वाब होते हैं देखने के लिए
उन में जा कर मगर रहा न करो

Muneer Niyazi

मुद्दत के बाद आज उसे देखकर 'मुनीर'
इक बार दिल तो धड़का मगर फिर सँभल गया

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जानते थे दोनों हम उस को निभा सकते नहीं
उस ने वादा कर लिया मैं ने भी वादा कर लिया

Muneer Niyazi
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महक उठे रंग-ए-सुर्ख़ जैसे
खिले चमन में गुलाब इतने

Muneer Niyazi
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वक़्त किस तेज़ी से गुज़रा रोज़-मर्रा में 'मुनीर'
आज कल होता गया और दिन हवा होते गए

Muneer Niyazi
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ये कैसा नश्शा है मैं किस अजब ख़ुमार में हूँ
तू आ के जा भी चुका है मैं इंतिज़ार में हूँ

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मैं उस को देख के चुप था उसी की शादी में
मज़ा तो सारा इसी रस्म के निबाह में था

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'मुनीर' अच्छा नहीं लगता ये तेरा
किसी के हिज्र में बीमार होना

Muneer Niyazi
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शहर का तब्दील होना शाद रहना और उदास
रौनक़ें जितनी यहाँ हैं औरतों के दम से हैं

Muneer Niyazi
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आवाज़ दे के देख लो शायद वो मिल ही जाए
वर्ना ये उम्र भर का सफ़र राएगाँ तो है

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जानता हूँ एक ऐसे शख़्स को मैं भी 'मुनीर'
ग़म से पत्थर हो गया लेकिन कभी रोया नहीं

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आदत सी बना ली है तुमने तो 'मुनीर' अपनी
जिस शहर में भी रहना उकताए हुए रहना

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मैं तो 'मुनीर' आईने में ख़ुद को तक कर हैरान हुआ
ये चेहरा कुछ और तरह था पहले किसी ज़माने में

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इक और दरिया का सामना था 'मुनीर' मुझ को
मैं एक दरिया के पार उतरा तो मैंने देखा

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