Dariya Shayari
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Dariya Shayari

    ये आग वाग का दरिया तो खेल था हम को
    जो सच कहें तो बड़ा इम्तिहान आँसू हैं

    Abhishek shukla
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    इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है
    नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो है

    Dushyant Kumar
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    हल करने से डरता हूँ
    सब आसान सवालों को

    लहरें देखती रहती हैं
    दरिया देखने वालों को

    Prakhar Kanha
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    हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है
    जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा

    Bashir Badr
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    एक ही नदी के हैं ये दो किनारे दोस्तो
    दोस्ताना ज़िंदगी से मौत से यारी रखो

    Rahat Indori
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    मैं एक ठहरा हुआ पुल, तू बहता दरिया है
    तुझे मिलूँगा तो फिर टूट कर मिलूँगा मै

    Subhan Asad
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    ये इश्क़ नहीं आसाँ इतना ही समझ लीजे
    इक आग का दरिया है और डूब के जाना है

    Jigar Moradabadi
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    सदियों से किनारे पे खड़ा सूख रहा है
    इस शहर को दरिया में गिरा देना चाहिए

    Mohammad Alvi
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    दरिया के किनारे पे मिरी लाश पड़ी थी
    और पानी की तह में वो मुझे ढूँड रहा था

    Adil Mansuri
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    लब-ए-दरिया पे देख आ कर तमाशा आज होली का
    भँवर काले के दफ़ बाजे है मौज ऐ यार पानी में

    Shah Naseer
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    एक दरिया है यहाँ पर दूर तक फैला हुआ
    आज अपने बाजुओं को देख पतवारें न देख

    Dushyant Kumar
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    कोई समुन्दर, कोई नदी होती, कोई दरिया होता
    हम जितने प्यासे थे हमारा एक गिलास से क्या होता?

    Tehzeeb Hafi
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    ज़रा पाने की चाहत में बहुत कुछ छूट जाता है
    नदी का साथ देता हूँ समंदर रूठ जाता है

    Aalok Shrivastav
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    चाँद चेहरा ज़ुल्फ़ दरिया बात ख़ुशबू दिल चमन
    इक तुम्हें दे कर ख़ुदा ने दे दिया क्या क्या मुझे

    Bashir Badr
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    इक मुहब्बत से भरी उस ज़िंदगी के ख़्वाब हैं
    पेड़ दरिया और पंछी तेरे मेरे ख़्वाब हैं

    Neeraj Nainkwal
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    मुतअस्सिर हैं यहाँ सब लोग जाने क्या समझते हैं
    नहीं जो यार शबनम भी उसे दरिया समझते हैं

    हक़ीक़त सारी तेरी मैं बता तो दूँ सर-ए-महफ़िल
    मगर ये लोग सारे जो तुझे अच्छा समझते हैं

    Nirvesh Navodayan
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    साथ चलते जा रहे हैं पास आ सकते नहीं
    इक नदी के दो किनारों को मिला सकते नहीं

    उसकी भी मजबूरियाँ हैं मेरी भी मजबूरियाँ
    रोज़ मिलते हैं मगर घर में बता सकते नहीं

    Bashir Badr
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    हमने तुझ पे छोड़ दिया है
    कश्ती, दरिया, भँवर, किनारा

    Siddharth Saaz
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    सदा लपेट के दिल जाएँगे वगरना नहीं
    पहाड़ आह से हिल जाएँगे वगरना नहीं

    वो आज दरिया से लड़ने की ठान कर गए थे
    कहीं किनारे पे मिल जाएँगे वगरना नहीं

    Nadeem Bhabha
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    यहाँ तुम देखना रुतबा हमारा
    हमारी रेत है दरिया हमारा

    Kushal Dauneria
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