@abhishek-shukla
Abhishek shukla shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Abhishek shukla's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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सियाह रात की सरहद के पार ले गया है
अजीब ख़्वाब था आँखें उतार ले गया है
है अब जो ख़ल्क़ में मजनूँ के नाम से मशहूर
वो मेरी ज़ात से वहशत उधार ले गया है
शब भर इक आवाज़ बनाई सुब्ह हुई तो चीख़ पड़े
रोज़ का इक मामूल है अब तो ख़्वाब-ज़दा हम लोगों का
पा ए उम्मीद प रक्खे हुए सर हैं हम लोग
हैं न होने के बराबर ही मगर हैं हम लोग
तू ने बरता ही नहीं ठीक से हम को ऐ दोस्त
ऐब लगते हैं बज़ाहिर प हुनर हैं हम लोग
मैं अपने चारों तरफ़ हूँ और इस तरह का हुजूम
अजीब किस्म की तन्हाई साथ लाता है
चलते हुए मुझ में कहीं ठहरा हुआ तू है
रस्ता नहीं मंज़िल नहीं अच्छा हुआ तू है
ये जो हम तख़्लीक़-ए-जहान-ए-नौ में लगे हैं पागल हैं
दूर से हम को देखने वाले हाथ बटा हम लोगों का
सफ़र के बाद भी ज़ौक़-ए-सफ़र न रह जाए
ख़याल ओ ख़्वाब में अब के भी घर न रह जाए
तेरी आँखों के लिए इतनी सज़ा काफ़ी है
आज की रात मुझे ख़्वाब में रोता हुआ देख
ये जो दुनिया है इसे इतनी इजाज़त कब है
हम पे अपनी ही किसी बात का ग़ुस्सा उतरा
किसी से झूठी मुहब्बत किसी से सच्चा बैर
मैं कर तो सकता हूँ ये सब मगर नहीं करूँगा