@aalok-shrivastav
Aalok Shrivastav shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Aalok Shrivastav's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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घर के बुज़ुर्ग लोगों की आंखें क्या बुझ गईं
अब रोशनी के नाम पर कुछ भी नहीं रहा
आए थे मीर ख़्वाब में कल डांट कर गए
क्या शायरी के नाम पर कुछ भी नहीं रहा
बाज़ार जा के ख़ुद का कभी दाम पूछना
तुम जैसे हर दुकान में सामान हैं बहुत
आवाज़ बर्तनों की घर में दबी रहे
बाहर जो सुनने वाले हैं, शैतान हैं बहुत
हम उसे आंखों की दहलीज़ न चढ़ने देते
नींद आती न अगर ख़्वाब तुम्हारे लेकर
एक दिन उसने मुझे पाक नज़र से चूमा
उम्र भर चलना पड़ा मुझको सहारे लेकर
दिलों की बातें दिलों के अंदर ज़रा सी ज़िद से दबी हुई हैं
वो सुनना चाहें, ज़ुबां से सब कुछ मैं करना चाहूं नज़र से बतियां
ये इश्क़ क्या है, ये इश्क़ क्या है, ये इश्क़ क्या है, ये इश्क़ क्या है
सुलगती सांसें, तरसती आंखें, मचलती रूहें, धड़कती छतियां
मुझे मालूम है माँ की दुआएँ साथ चलती हैं
सफ़र की मुश्किलों को हाथ मलते मैंने देखा है
अब तो उस सूने माथे पर कोरेपन की चादर है
अम्मा जी की सारी सजधज, सब ज़ेवर थे बाबूजी
कभी बड़ा सा हाथ ख़र्च थे कभी हथेली की सूजन
मेरे मन का आधा साहस, आधा डर थे बाबूजी
घर में झीने रिश्ते मैंने लाखों बार उधड़ते देखे
चुपके चुपके कर देती है जाने कब तुरपाई अम्मा
ग़नीमत है नगर वालों लुटेरों से लुटे हो तुम
हमें तो गांव में अक्सर, दरोगा लूट जाता है
ज़रा पाने की चाहत में बहुत कुछ छूट जाता है
नदी का साथ देता हूँ समंदर रूठ जाता है
नज़दीकी अक्सर दूरी का कारन भी बन जाती है
सोच-समझ कर घुलना-मिलना अपने रिश्ते-दारों में
तुम सोच रहे हो बस, बादल की उड़ानों तक
मेरी तो निगाहें हैं सूरज के ठिकानों तक
तुम्हारे पास आते हैं तो साँसें भीग जाती हैं
मोहब्बत इतनी मिलती है कि आँखें भीग जाती हैं
तबस्सुम इत्र जैसा है हँसी बरसात जैसी है
वो जब भी बात करती है तो बातें भीग जाती हैं
यही तो एक तमन्ना है इस मुसाफ़िर की
जो तुम नहीं तो सफ़र में तुम्हारा प्यार चले