सब ज़बानों की जान है उर्दू
कितनी प्यारी ज़बान है उर्दू
सारे अल्फ़ाज़ क़ीमती गौहर
जौहरी की दुकान है उर्दू
ये तराशे हुए हसीं जुमले
जैसे हीरों की कान है उर्दू
एक इक लफ़्ज़ मिस्ल-ए-शीर-ओ-शकर
कितनी मीठी ज़बान है उर्दू
सारी दुनिया में जिस की शोहरत है
फ़ख़्र-ए-हिन्दोस्तान है उर्दू
ख़्वाह हिन्दू हो सिख हो या मुस्लिम
हर बशर की ज़बान है उर्दू
शहर-ए-दिल्ली का सिर्फ़ दिल ही नहीं
सारे भारत की जान है उर्दू
हैदराबाद-ओ-लखनऊ ही नहीं
हर जगह की ज़बान है उर्दू
कितनी सदियाँ गुज़र चुकीं लेकिन
आज तक नौजवान है उर्दू
'कैफ़' उर्दू के जो मुख़ालिफ़ हैं
उन के घर की ज़बान है उर्दू
— Kaif Ahmad Siddiqui















