मिरी गुड़िया किसी दिन चाँद पर शादी रचाएगी

ज़मीं के तो सभी गुड्डे नज़र आते हैं अब बुड्ढे
बहुत ही ख़ूब-सूरत नौजवाँ हैं चाँद के गुड्डे
उन्हीं में से किसी के घर मिरी गुड़िया भी जाएगी
मिरी गुड़िया किसी दिन चाँद पर शादी रचाएगी
फ़रिश्ते आसमानों से बराती बन के आएँगे
सितारे रास्ते में नूर की चादर बिछाएँगे
ख़ुशी से झूम कर हर हूर शहनाई बजाएगी
मिरी गुड़िया किसी दिन चाँद पर शादी रचाएगी
हसीं किरनों से रौशन चाँदनी की पालकी होगी
ज़मीं से आसमाँ तक रौशनी ही रौशनी होगी
मिरी गुड़िया जब अपने घर से रुख़्सत हो के जाएगी
मिरी गुड़िया किसी दिन चाँद पर शादी रचाएगी
नज़र आएगी जब उस को मिरी प्यारी सी ये गुड़िया
बलाएँ पर बलाएँ लेगी बढ़ कर चाँद की बुढ़िया
दुल्हन को देख कर दूल्हे की क़िस्मत जगमगाएगी
मिरी गुड़िया किसी दिन चाँद पर शादी रचाएगी

— Kaif Ahmad Siddiqui

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