कोई सोमनाथ का मंदिर नहीं था
और न तलवार वाले हाथ थे ग़ौरियों के
मगर लुट गया मिरा शहर
बस नाम पर अयोध्या के
— Kahkashan Tabassum
और न तलवार वाले हाथ थे ग़ौरियों के
मगर लुट गया मिरा शहर
बस नाम पर अयोध्या के
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Poetry by feeling