दरख़्त के सहारे बुलंदी से हम-कनार होने वाली बेल
अपनी ख़ुसूसियत से महरूम नहीं हो जाती
दरख़्त में अपनी शनाख़्त मुदग़म नहीं कर देती
तुम अगर दरख़्त नहीं बन सकते
तो
बेल हो जाओ
— Javed Nadeem
अपनी ख़ुसूसियत से महरूम नहीं हो जाती
दरख़्त में अपनी शनाख़्त मुदग़म नहीं कर देती
तुम अगर दरख़्त नहीं बन सकते
तो
बेल हो जाओ
Other nazm from the same pen
Shers of shajar.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling