उजाले छोड़ अँधेरों से दोस्ती करताकिसी बहाने से मैं ख़त्म ज़िंदगी करताइसी कमाल ने मुझ को बचा लिया वर्नामैं शा'इरी नहीं करता तो ख़ुद-कुशी करता— Irshad 'Arsh'