फिंदक फिंदक फिंदक फ़क
धुनक धुनक धुन धुनक धुनक
ताँत बजी और निकला राग
रुई बनी साबुन का झाग
कैसी छनती जाती है
बादल बनती जाती है
कितना ढेर हुआ आहा
मैं इस ढेर पे कूदुँगा
कोई चोट न आएगी
रूई मगर दब जाएगी
इत्ती रूई इतना ढेर
हो गई बारह तेरह सेर
ले अब रूई हो गई साफ़
भर ले तकिए और लिहाफ़
इन से सब सुख पाते हैं
ओढ़ते और बिछाते हैं
मिलता है सब को आराम
वाह रे धुनिए तेरा काम
वाह री धुनकी धुनक धुनक
फिंदक फिंदक फ़क फ़क फ़क
— Hafeez Jalandhari















