आ जा री चिड़िया

आ जा री चिड़िया
मुंडेर पर क्यूँ
करती है चूँ चूँ
आ जा तुझे मैं
दाना खिलाऊँ
रोटी के भूरे
छत पर बिखेरूँ
ले अपना खाजा
खा जा री चिड़िया
सुन ले री चिड़िया
सुन ले री चिड़िया
क्या नन्हे नन्हे
बच्चे हैं तेरे
करते हैं चीं चीं
इतने सवेरे
ले मैं ने गेहूँ
छत पर बिखेरे
ये दाने दुनके
चुन ले री चिड़िया
सुन ले री चिड़िया
सुन ले री चिड़िया
आ प्यारी चिड़िया
आ प्यारी चिड़िया
उड़-उड़ के आना
मुड़ मुड़ के जाना
बच्चों को अपने
दाना खिलाना
लगता है जी को
कैसा सुहाना
क्या प्यारा प्यारा
है तेरा गाना
गा ख़ूब दिन भर
गा प्यारी चिड़िया
आ प्यारी चिड़िया
आ प्यारी चिड़िया
उड़ जा री चिड़िया
उड़ जा री चिड़िया
वो मानो बिल्ली
बैठी है दुबकी
तुझ को पकड़ कर
बस खा ही लेगी
मिट्टी के ऊपर
जा बैठ ऊँची
नीचे न आना
मुड़ जा री चिड़िया
उड़ जा री चिड़िया
उड़ जा री चिड़िया

— Hafeez Jalandhari

More by Hafeez Jalandhari

Other nazm from the same pen

See all from Hafeez Jalandhari →

Beautiful Subah Shayari

Shers of beautiful subah.

All Beautiful Subah Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling