सावन आया
उन के घर, मेरे भी घर
उन के आंगन में मँडरायीं
खूब घटायें काली काली,
उन के ऑँगन के गमलों में
विखर गई सुंदर हरियाली,
नूतन किसलय फूट पडे हैं
झूम रही है डाली डाली,
कुछ भी हो उन के आँगन की
सुन्दरता है बहुत निराली।
उन के घर कोने कोने में उमडा है ख़ुशियों का सागर..।
सावन आया............
मेरे घर की बूढी छत ने
अपनी जर्जरता दिखलाई,
कमरे में पानी भर आया
आँगन में पसरी है काई,
छोटू बिट्टू मुन्नू मिट्ठू
ने अपनी कश्ती तैराई,
वो भी ख़ुश हैं मैं भी ख़ुश हूँ
सावन तुझ को लाख बधाई।
उन का सावन भी सुंदर है मेरा सावन उन से सुन्दर।
सावन आया
उन के घर, मेरे भी घर
— Gyan Prakash Akul















