दिल में ऐसे ठहर गए हैं ग़म
जैसे जंगल में शाम के साए
जाते-जाते सहम के रुक जाएँ
मुड़के देखें उदास राहों पर
कैसे बुझते हुए उजालों में
दूर तक धूल-ही-धूल उड़ती है
— Gulzar
जैसे जंगल में शाम के साए
जाते-जाते सहम के रुक जाएँ
मुड़के देखें उदास राहों पर
कैसे बुझते हुए उजालों में
दूर तक धूल-ही-धूल उड़ती है
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