अम्मी अब्बा कैसे हैं

टेढ़े हैं या सीधे हैं
गुम-सुम रहने वाले हैं
बातें करने वाले हैं
ज़ेहन-ओ-दिल के कैसे हैं
गर्म हैं या फिर ठंडे हैं
प्यार लुटाने वाले हैं
आँख दिखाने वाले हैं
नाज़ उठाने वाले हैं
डाँट पिलाने वाले हैं
दिल्ली में क्यूँ रहते हैं
दिल्ली में क्या करते हैं
खाना कौन बनाता है
उन को कौन खिलाता है
किन से बातें करते हैं
किन की बातें सुनते हैं
तन्हा कैसे रहते हैं
तन्हाई क्यूँ सहते हैं
क्यूँ संडे में आते हैं
अंकल जैसे लगते हैं
संडे में भी सोते हैं
छुट्टी को भी खोते हैं
अम्मी उन से बोलो ना
होंट ज़रा तुम खोलो ना
बोलो उन से पास रहें
हम से भी कुछ बात करें
हम लोगों का हाल सुनें
अपनी कोई बात कहें
बोलो ना कि चुस्त रहें
ऐसे भी न सुस्त रहें
हम को ले कर शहर चलें
घू
में फिरें और मौज करें
हम में कैसी दूरी है
ये कैसी मजबूरी है

— Ghazanfar

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