वे बाहर कितने बजे भी जा सकती है

किसी भी काम से
जैसे प्याज ख़रीदने हो दाल छोंकने से तुरंत पहले
या फोटोकॉपी करवानी हो डिग्रियाॅं
हो सकता है कि वे घर से भागने के लिए निकली हों
या लौट रही हों घर
जैसे वे लौटती आई है सदियों से
उस प्रेमी के साथ हफ़्ता या महीना बिता कर
जिस ने कहा था कि साथ मरेंगे
पर एक सुब्ह होटल का बिल दिए बिना भाग निकला और फिर लौटा नहीं.
हो सकता है कि वे घर से भागने के लिए निकली हों
या फिर घर लौट रही हों
या फिर जिस्म भी बेचती हो सकती है
और इंश्योरेंस भी
मैं ने तो उन्हें मोक्ष बेचते भी देखा है
पर उसपर फिर कभी.
उन के हाथ में रैकेट हो तो ये समझना की वो टेनिस खेलने जा रही है
कोई रॉकेट साइंस नहीं लगता ये समझने में
पर अगर हाथ में हॉकी हो तो वे खेलने के लिए भी जा रही हो सकती है
और मारने के लिए भी
मारना सही नहीं क़ानूनन हालाँकि,
सही तो ये भी नहीं कि तुम बार बार सिखाने के बावजूद
ये बेसिक सी बात नहीं सीख पाए आज तक
कि वे बाहर कितने भी बजे जा सकती है
किसी भी काम से.

— Gaurav Solanki

Kamar Shayari

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