दूर तक फैले हुए एक घने जंगल में
दो-शजर खींच के सायों को जहाँ मिलते हैं
इस जगह धूप भी सूरज से मिला करती है
ओढ़ कर शाम की फूलों-भरी चादर अक्सर
जैसे दो शख़्स बिछड़ने के लिए मिलते हैं
— Faisal Hashmi
दो-शजर खींच के सायों को जहाँ मिलते हैं
इस जगह धूप भी सूरज से मिला करती है
ओढ़ कर शाम की फूलों-भरी चादर अक्सर
जैसे दो शख़्स बिछड़ने के लिए मिलते हैं
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